Sindhu Ghati Sabhyata|सिंधु घाटी सभ्यता की खोज और महत्वीपूर्ण जानकारी

Rate this post

सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation)  

इस पृथ्वी पर इन्सानो का जीवन हजारो साल पहले से हुआ और अबतक फलता-फूलता आ रहा है। इस दौरान बहोत सी सभ्यताए आई और कई विकसित हुई। इसमें से एक थी सिंधु घाटी सभ्यता जे आज भी आधुनिक सभ्यताओं से तकनिकी के मुकाबले कही ज्यादा उन्नत के शिखर पर थी लेकिन प्राकृतिक आबदा के चलते यह sabhyata मिट्टी में दफ़न हो गई। तो दोस्तों आइए जानते है sindhughati ki sabhyata से जुडी कुछ रोचक बाते।

My secret Guide में आप लोगो का स्वागत है। तो आइए जानते है Sindhu Ghati Sabhyata ka Itihas, भारत के बटवारे की वजह से Sindhu नदी सबसे ज्यादा पाकिस्तान में बहती है। चीन से निकलने वाली Sindhu नदी की भारत में कुल लंबाई १००० की.मि है। सिंधु साम्राज्य सिंधु नदी के पार बहोत बड़े क्षेत्र में पाकिस्तान के उतर पश्चिमी भारत और पूर्वीय अफ़ग़ानिस्तान तक फैला हुआ है।

सिंधु घाटी सभ्यता (Sindhu Ghati Sabhyata in Hindi) 

Sindhu दुनिया की सबसे बड़ी २१ नदियों में से एक है। इतिहास की किताबो में आप जिस Sindhu Ghati Sabhyata के बारे में पढ़े होंगे वह सभ्यता इसी सिंधु नदी के किनारे विकसित हुई थी। सिंधु को इंडस (Indus) भी कहा जाता है जिसके नाम पर हमारे देश का नाम India पड़ा था। जम्मू कश्मीर से हो कर पाकिस्तान में बहने वाली सिंधु आस-पास  आज भी करीब ३० करोड़ की आबादी बसती है।

Sindhu नदी का इलाका करीब 3500 की.मी में फैला हुआ है जिसका करीब 50 % हिस्सा पाकिस्तान में आता है। पाकिस्तान की आधी से ज्यादा आबादी इसी नदी पर निर्भर है। पीने से लेकर खेती और बिजली के लिए पाकिस्तान को Sindhu नदी का ही सहारा है। चीन से निकलकर सिंधु नदी जम्मु-कश्मीर होते हुए पाकिस्तान में जाती है ओर फिर कराची से आगे जाकर अरब सागर में समां जाती है।

सिंधु घाटी सभ्यता

हड़प्पा सभ्यता की खोज किसने की? (Harappa Sabhyata ki Khoj)

हासिल किए गए तथ्यों के अनुसार पहली बार चार्ल्स मैसेन (Charles Masson) ने वर्ष 1842 में हड़प्पा सभ्यता (Hadppa Sanskruti) को खोजा था इसके बाद दयाराम सहानी ने वर्ष 1921 में आधिकारिक खोज की थी लेकिन अपनी इस खोज के दौरान वे मेहेंजोदड़ो (Mohenjo-daro) नामक नगर के बेहद नजदीक होते भी उसे खोज नहीं पाए थे।

लेकिन कुछ सालो बाद राखालदास बेनर्जी ने ऐसे-ऐसे नगर खोज निकाले जिसका दृश्य देखकर वे खुद हैरान रह गए यह था मोहनजोदड़ो नगर जो उनके अनुसार तक़रीबन 200 हेक्टर क्षेत्र में फैला हुआ था।

दुनिया की सबसे लंबी नदियों में से एक sindhu नदी अब तो भारत में केवल जम्मू-कश्मीर में ही बहती है लेकिन एक जमाना था जब सिंधु नदी गुजरात में बहा करती थी। बात करीब 200 साल पहले की है। सन 1819 में आए भयानक भूकंप ने नदी की धारा बदल दी और गुजरात में लखपत (Lakhapat) जिले के बगल से बहने वाली यह नदी 150 किलोमीटर दूर चली गई।

गुजरात के कच्छ जिले में पड़ने वाला लखपत इलाका सिंधु नदी के कारण तब काफी सुखी और समृद्ध था लेकिन नदीने धारा बदली तो लखपत की खुशहाली अतीत का हिस्सा बन कर रह गई।

देश के बंटवारे से पहले तक भारत के कच्छ से पाकिस्तान के सिंध जाने के लिए लखपत अहम ठिकाना था। भारतीय इतिहास में Sindhu नदी को काफी अहम माना जाता है वेदों में भी सिंधु नदी का जिक्र है यकीन मानिए Mohanjodado (मोहनजोदारो)  का इतिहास जानने के बाद आप सच में भारतीय इतिहास पर गर्व महसूस करेंगे। कला का ऐसा खजाना भारत ने ही दुनिया को दिया है यह जानने के बाद आप देश को एक अलग ही नजरिए से देखने लगेंगे।

सिंधु घाटी सभ्यताकी खोज (Sindhu ghati Sabhyata ki khoj) 

सिंधु घाटी सभ्यता (indus Valley) 2300  ईसापूर्व से 1700 ईसापूर्व अध्यक्ष परिपक्वता 2550 ईसा पूर्व से 1750 ईसा पूर्व) दुनिया की प्राचीन नदी घाटी सभ्यता में से एक प्रमुख सभ्यता माना जाता है। जो दक्षिण एशिया के उत्तर पश्चिमी क्षेत्रों में जो आज तक उत्तर पूर्व अफगानिस्तान, पाकिस्तान के उत्तर पश्चिमी और उत्तर भारत में फैली हुई है।

यह प्राचीन मिस्र और कई प्राचीन सभ्यताओं के साथ दुनिया के सभ्यताओं के तीन शुरुआती कालक्रमो में से एक थी जिनकी शोध 8000 वर्ष पुरानी है और इस सभ्यता को हड़प्पा (Hadppa)  और सिंधु-सरस्वती सभ्यता (Sindhu – Sarsvati sabhyata) के नाम से भी जाना जाता है।

इसका विकास सिंधु और और घघ्घर/हकड़ा के किनारे हुआ और इसके प्रमुख केंद्र हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा और राखी घाटी थे।

हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख विशेषता (Harappa Sabhyata in Hindi)

हड़प्पा की खोज 1921 में रायबहादुर दयाराम साहनी ने 1921 में की थी। उसका पहला हिस्सा माउंटगोमरी पंजाब पाकिस्तान में ढूंढा गया जो रावी नदी के तट पर स्थित है। यहां से 2 टीले प्राप्त हुए यानी कि यहां से 2 टीलों की खुदाई की गई जिनमें पहले टीले का नाम दिया गया माउंट-AB जिसे दुर्ग टीला भी कहा जाता है और दूसरा टीला माउंट-F जिसे नगर टीले के नाम से जाना जाता है।

जब माउंट-F  की खुदाई की गई तो उसके अंदर से पूरा नगर मिला जिसमें विशाल अन्नागार, इस विशाल अन्नागार में लगभग 12 कमरे बने हुए थे जो एक-एक  पंक्ति में से 6-6 बने हुए थे। उसके बाद वृताकार चबूतरे मिले जो कि इतो से बने हुए थे। और इतिहासकार ऐसा मानते हैं कि इस चबूतरे के बीच में छेद भी रहा होगा और यह जो चबूतरे हैं उसे अनाज पीसने के उपयोग में लाया जाता था।

hadppa ki khoj

इसके बाद यहां से जले हुए गेहूं और जौ के दाने मिले हैं। दूसरा वहां से श्रमिक आवास मिला है (मतलब मजदूरों के रहने का घर) यहां से करीब 15 आवास मिले हैं  जो कि 2 पंक्तियों में है। एक पंक्ति में 7 घर और दूसरे में 8 घर है। यहां प्रत्येक घर 17 मीटर लंबा है और 7.5 मीटर चौड़ा है और इसके बाद यहां से एक बर्तन पर मछुआरे का बना चित्र मिला है।

हड़प्पा से और भी कई चीजें मिली है जिनमें शंख का बैल और पीतल की इक्का गाड़ी  उसके बाद यहां से कब्रिस्तान मिला है जहां मुद्दों को दफनाया जाता है जो दो प्रकार के हैं। जिनके नाम दिए गए हैं समाधि R-37 और दूसरे का समाधि H रखा गया है। और यह जो समाधि R-37 है इसके लगभग 37 कब मिले हैं इसलिए इसका नाम समाधि आर R-37 रखा गया है।

वही जो समाधि एच है उसे अब्बर के काल का माना जाता है  और यहां पर सबों को उत्तर दक्षिण दिशा में गाढा जाता था। यानी कि सब के सिर  उत्तर दिशा में रखा जाता था। इसके अलावा भी बहुत सी महत्वपूर्ण चीजें मिली है।

मोहनजोदड़ो का इतिहास (Mohenjo Daro History)

मोहनजोदड़ो (Mohenjo daro) की खोज राखल दास बनर्जी द्वारा 1922 में की गई थी जब राखल दास बनर्जी को पता चला कि इस क्षेत्र में पुषणकालीन वेद क्षेत्र है। और उसके उत्खनन के लिए वहां गए थे और जब वह खुदाई कर रहे थे तो उसे उसके पास से एक और टीला मिला उसको भी उसने खुदवाया कि शायद यहां से भी कुछ मिले और उसके नीचे से उसे मोहनजोदड़ो (Mohenjo daro) प्राप्त हुआ।

यह लरकाना जिल्ला सिंध पाकिस्तान में स्थित है। और यह हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की स्थिति लगभग 600 किलोमीटर दूर है। मोहनजोदड़ो Sindhu नदी के किनारे पर स्थित है।

सिंधु घाटी पर एक विशाल स्नानागार प्राप्त हुआ है जिसमें एक साथ बहुत सारे लोग नहा सकते हैं। इसको तत्कालीन विश्व का आश्चर्य माना जाता है क्योंकि ऐसी चीज किसी भी सभ्यता में देखि या पाई नहीं गई है। और मोहनजोदड़ो (Mohenjo daro) में जो अन्नागार प्राप्त हुआ है यह पूरे सिंधु घाटी सभ्यता से जितने भी भवन प्राप्त हुए हैं उससे काफी बड़ा है। इस लिए इसे विशाल अन्नागार कहा जाता है।

इसके बाद मोहनजोदड़ो से सभा भवन प्राप्त हुआ है और पुरोहित आवास भी मिला है। धर्म संबंधित जो अधिकारी होते थे उन पुरोहित के लिए यहां घर बनाए गए थे वह Purohit Bhavan भी यहां से मिला था।

नग्न स्त्री की कांस्य प्रतिमा (सिंधु घाटी सभ्यता)

उसके बाद नृत्यरत नग्न स्त्री की कांस्य प्रतिमा जिसको Sindhu Ghati का सबसे सर्वोत्तम पृष्ठ नमूना माना जाता है।  बाद में यहां से पशुपति शिव की मूर्ति प्राप्त हुई है और यहां से शतरंज भी प्राप्त हुआ है।  प्राचीन काल में उसे चौपड़ कहा जाता था वह शतरंज भी यहां से प्राप्त हुआ है।

हड़प्पा सभ्यता का अंत कैसे हुआ (Harappa Sabhyata ka Patan)

सिंधुघाटी सभ्यता  (Sindhu ghati Sabhyata) यानि की हड़प्पा सभ्यता का पतन लगभग 1800 ई० पू० लक्षण स्पष्ट दिखाई देने लगे थे। इस समय तक सिन्धु घटी सभ्यता के दो प्रमुख केन्द्र हड्प्पा एवम मोहनजोदडो नष्ट हो चुके थे या विनाश कैसे हुआ इस बात का कोई ठोस प्रमाण तो उपलब्ध नहीं है,

लेकिन वहा हुई खुदाई के दौरान मिले सबूतों के आधार विशेषज्ञो का मानना है की किसी बाहरी आक्रमणकारो या बार्बर जाती द्वारा Sindhu Ghati के शांतिप्रिय लोगो को युद्ध में पराजय दी गई और भयंकर नरसंहार द्वारा नष्ट कर दिया गया।

फिर भी इसके पतन के बारे में कल्पना की जा सकती है, क्योंकि जहाँ इतिहास असफल हो जाता है, वहाँ हम कल्पना का आश्रय लेते हैं। अधिकांश विद्वानो के मतानुसार इस सभ्यता का अंत बाढ़ के प्रकोप से हुआ, चूँकि सिंधु घाटी सभ्यता नदियों के किनारे-किनारे विकसित हूई, इसलिए बाढ़ आना स्वाभाविक था, अतः यह तर्क सर्वमान्य हैं।

परंतु कुछ विद्वान मानते है कि केवल बाढ़ के कारण इतनी विशाल सभ्यता समाप्त नहीं हो सकती। इसलिए बाढ़ के अलावा भिन्न-भिन्न कारणों का समर्थन भिन्न-भिन्न विद्वान करते हैं जैसे – आग लग जाना, महामारी, बाहरी आक्रमण आदि।

Sindhu Ghati Sabhyata FAQ in Hindi

Q.1 कौन कौन से नगर सिंधु सभ्यता के बंदरगाह नगर थे?

इनमें यह चार बंदरगाह नगर थे लोथल, बालाकोट, सुतकोत्दा और अलहदिनों इनमें से ये लोथल है वह भोगवा नदी पर भारत में और इसकी खोज एस. आर. राव की थी। बालाकोट यह बिन्दार नदी के तट पर पाकिस्तान में स्थित है और उसकी खोज जी. एस डेल्स ने की थी। सुतकोत्दा यह दाश्क नदी के तट पर पाकिस्तान में है और ऑएल स्टाइन ने इसकी खोज की थी। अलहदिनों सिंधु नदी पर पाकिस्तान में और उसकी खोज फियर सर्विस ने की थी।

Q. 2 सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी इमारत कौन सी है?

सिंधु सभ्यता की सबसे बड़ी इमारत “अन्नागार” थी, मेहनजोदडो का अन्नागार 45.75 मीटर लंबा 22.86 मीटर चौड़ा था हड़प्पा के दुर्ग में 12 धन्य कोठरे मिले है। यह धान्य कोठरे इतो के चबूतरे पर है। प्रत्येक घान्य कोठार का आकर 15.23 मीटर x 6.09 मीटर है।
अन्नागार में हवा जाने की व्यवस्था है, और उसका आकर – प्रकार, हवा आने जाने की व्यवस्था तथा अन्न भरने की व्यवस्था उच्च कोटि की थी।

Q.3 सिंधु घाटी के लोगों का मुख्य भोजन क्या था?

सिंधु घाटी सभ्यता के अधिकतर लोग गेहू, जो और कपास की खेती करते थे इस लिए उनका मुख्य खोराक गेहू और जो था।

Q.4 हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल कौन कौन से हैं?

हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, चन्दूदड़ो, कालीबंगा, कोटदीजी और रंगपुर है।

इसे भी पढ़े!

Spread the love

1 thought on “Sindhu Ghati Sabhyata|सिंधु घाटी सभ्यता की खोज और महत्वीपूर्ण जानकारी”

Leave a Comment