वाइट फंगस क्या है? कारण और इसके बचाव|White Fungal Disease in Hindi

क्या है वाइट फंगस? White Fungus in Hindi

अभी कोरोना महामारी का असर देश में जारी ही है कि हमें अन्य कहीं बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है जैसे Black fungus और White fungus. कई राज्यों में एक के बाद एक ब्लैक फंगस के मरीजों की बढ़ती तादाद को देखकर राज्य सरकार ने इस को महामारी घोषित करने का फैसला लिया।

यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, सहित और भी कई हिस्से में ब्लैक फंगस तेजी से बढ़ रहा है। अभी Black fungus से ही छुटकारा नहीं मिला था कि एक और बीमारी वाइट फंगस यानी म्यूकर माइकोसिस (mucormycosis) के मरीज भी सामने आने लगे हैं।

विशेषज्ञों की research के अनुसार यह White fungus, Black fungus से भी अधिक घातक और खतरनाक है क्योंकि यह मनुष्य के फेफड़ों और मस्तिष्क को अपनी चपेट में लेकर उसे प्रभावित कर देता है। इसका असर केवल एक अंग पर नहीं बल्कि फेफड़ों और मस्तिष्क के साथ-साथ हर एक अंग पर होता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वाइट फंगस के ज्यादातर मामले बिहार में सामने आए हैं। और आज हम लोग इसी topic के ऊपर बात करने जा रहे है की आखिर यह है क्या, उसके कारण और बचाव। तो आइए जानते white fungus in hindi के बारेमें।

शरीर में कैसे करता है वाइट फंगस प्रवेश (Fungal Enter in Body)

white fungal का ज्यादा प्रभाव कम Immunity वाले लोगों में देखा गया है। इसे चिकित्सीय भाषा में कैंडिडा (Candida fungus) भी कहते हैं। विशेष रूप से उन लोगों को जिनको एचआईवी, मधुमेह जैसे रोग हैं या फिर वह लोग जो काफी समय से Steroids का प्रयोग कर रहे हैं।

यह पूरे शरीर में खून के जरिए फैल जाता है और हर अंग को प्रभावित कर देता है। यह बीमारी म्यूकर माइसाइट नामक फफूंद से होती है।

यह फंगस हवा में होता है और सांस के जरिए नाक में प्रवेश कर जाता है। नाक के माध्यम से बाकी सभी अंग में यह fungus पहुंच जाता है। इसके अलावा शरीर के किसी कटे हुए अंग के संपर्क में अगर यह फंगस आ जाता है तो भी यह संक्रमण हो सकता है।

क्या है वाइट फंगस के मुख्य लक्षण? (Symptoms of White Fungus in Hindi)

विशेषज्ञों के अनुसार white fungus से सिर में तेज दर्द, नाक बंद या नाक में पपड़ी  जमना, आंखों में सूजन आ जाना या आंखें लाल हो जाना या उल्टियां होती है। अगर शरीर के किसी Joint पर इसका असर होता है तो जोड़ों में दर्द होता है। यह स्किन, नाखून,पेट, ब्रेन, प्राइवेट पार्ट्स और मुंह के साथ-साथ फेफड़ों को भी संक्रमित कर देता है।

अगर इसका असर व्यक्ति के मस्तिष्क (brain) पर होता है तो व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता पर बहुत असर होता है, साथ ही साथ उसे बोलने में भी समस्या होती है। इसके साथ शरीर में छोटे-मोटे फोड़े जो समयानुसार दर्द रहित रहते हैं। ऐसे लक्षण होने पर हमें जल्द से जल्द doctor से परामर्श लेना चाहिए।

एक बात मैं आपको इस ब्लॉग के जरिए बता देना चाहता हूं कि यह फंगस Corona virus की तरह, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से नहीं होता, यह केवल तभी होता है जब आप सीधे fungus के संपर्क में आते हैं।

जरूरी नहीं है कि जिस व्यक्ति को कोविड हो उसे ही यह फंगस होगा। हालांकि यह फेफड़ों पर असर करता है इसलिए इस के कुछ लक्षण कोरोना से लगभग मिलते जुलते हैं जैसे छाती में दर्द होना, सांस फूलना इत्यादि।

खतरा और भी तब बढ़ जाता है जब फेफड़ों पर असर होने पर लोग अपने आपको corona संक्रमित समझ कर घर पर ही कोरोना की दवा लेने लगते हैं। इससे हालात और बिगड़ जाते हैं।

White Fungus Infection आखिर क्यों इतना खतरनाक है?

जिनकी Immunity कमजोर होती है उन्हें यह संक्रमण आसानी से हो जाता है। अगर वह किसी संक्रमित चीजों, पेड़-पौधे, वनस्पति, या दूषित पानी के संपर्क में आते हैं तो ये Infection हो सकता है।

इसके अलावा कोविड संक्रमित मरीज, उन्हें oxygen चढ़ाई जा रही हो उन्हें भी यह संक्रमण हो सकता है। मरीज के नाक या मुंह पर लगे उपकरण यदि फंगस युक्त हो तो भी यह Infection होने के चांसेस हैं।

वाइट फंगस के अधिक समय होने पर Infection व्यक्ति के मुख्य चपेट में आ जाते हैं और मरीज के Organ failure हो जाने की वजह से उसकी death भी हो सकती है। इसलिए जल्द से जल्द इसका इलाज शुरू हो जाना चाहिए।

नवजात शिशुओं में भी white fungus हो सकता है। शिशुओं को पहनने वाले डायपर से सही है उनको अपनी चपेट में ले सकता है। छोटे बच्चों में यह ओरल थ्रस्ट करता है।

कौन-कौन सी जांच है जरूरी?

हाल ही में पटना कॉलेज में 4 मरीज white fungal से संक्रमित पाए गए हैं। उन्हें कोरोना वायरस के लक्षण भी पाए गए हैं। हालांकि वह दवा लेने पर ठीक हो सकते हैं। वाइट फंगस से संक्रमित मरीजों का जब सिटी स्कैन (City scan) होता है तो उनके फेफड़ों में कोरोना जैसे ही संक्रमण दिखते हैं।

इसलिए इसकी पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है, यदि सिटी स्कैन कोविड के लक्षण दिख रहे हैं तो मरीज को बलगम का कल्चर टेस्ट करवाने से वाइट फंगस का पता लग सकता है।

स्त्रियों में ल्यूकोरिया के रूप में

महिलाओं में White fungal का खतरा ज्यादा होता है और यह उनमें ल्यूकोरिया (प्रदर) के रूप में दिखता है। ल्यूकोरिया मतलब जननांगों से सफेद स्राव आना है। कैंसर से पीड़ित व्यक्तियों को भी इससे ज्यादा खतरा है क्योंकि उनका इम्यूनो सिस्टम, औरों के मुताबिक कमजोर होता है।

ऐसे हो सकता है इलाज (Treatment)

वाइट फंगस या ब्लैक फंगस का इलाज एंटीफंगल दवाओं से हो सकता है हालांकि ये दवाएं ज्यादा असरदार नहीं होती है। पर यदि बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही हम इसका प्रयोग करें तो यह बीमारी को नष्ट कर सकती हैं। देर से बीमारी का पता चलने पर उसे अस्पताल में भर्ती करने से ही इलाज संभव है।

मरीजों के इलाज में उपयोग आने वाले Oxygen sports या Ventilator आदि जैसे उपकरण विशेष रूप से जीवाणु मुक्त होने चाहिए। मरीजों के नाक और मुँह पर लगाने वाले उपकरण fungus मुक्त होने चाहिए। पूर्ण रूप से शुद्ध पानी का ही उपयोग करने से इस फंगस के खतरे को कम किया जा सकता है।

सावधानियां

Black fungal और White fungal का अधिक खतरा शुगर वाले मरीजों को होता है। इसलिए शुगर लेवल को कम करना बहुत जरूरी है। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री Satyendra jain ने बताया कि डायबिटीज के मरीजों को हमेशा अपना Sugar level चेक करते रहना चाहिए साथ ही Steroids से बिल्कुल ही दूर रहना चाहिए।

दोस्तों हम आशा करते है की आप लोगों को हमारी यह White  Fungus in Hindi के रिलेटेड जानकारी अच्छी और informative लगी होगी। अभी इस कोरोना महामारी के समय हम सभी से गुजारिश करते है की घर में रहे सुरक्षित रहे। और सभी चीजों में सावधानिया बरतें ताकि किसी को भी ऐसे बीमारियों का सामना ना करना पड़े धन्यवाद्।

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