(COVID-19) Plasma kya hai|प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीज ठीक हो सकते है?

प्लाज्मा क्या है? प्लाज्मा थेरेपी क्या है, रक्त और प्लाज्मा में क्या अंतर क्या है और कौन डोनेट कर सकता हे प्लाज्मा और उससे क्या-क्या नुकसान हो सकते है पूरी जानकारी हिंदी में!

कोरोना महामारी के चलते ज्यादातर चर्चा में रहने वाला topic प्लाज्मा और Plasma therapy जिनके ऊपर रोक लगाने की मांग चल रही है उसके पीछे क्या कारन है क्या इस थेरेपी से कोरोना के मरीज ठीक नहीं होते, plasma kya hai और प्लाज्मा थेरेपी क्या है? उन सब से जुडी तमाम जानकारी आज हम इस पोस्ट में देने जा रहे है तो इसे पूरा पढ़े।

प्लाज्मा क्या है? और उससे जुडी जानकारी से रिलेटेड 10th, 12th और कॉम्पिटिशन एक्साम्स में कई बार questions पूछे जाते है उन सब बातों ध्यान रखते हुए हमने इस आर्टिकल को लिखा है ताकि उन स्टूडेंट्स की हेल्प हो सके जो आने वाले समय में एग्जाम देने जा रहे है। 

प्लाज्मा क्या है हिंदी (Plasma Kya Hai)

प्लाज्मा क्या होता है? क्लास 10th,12th और competition exams में बहुत बार पूछे जाने वाला सवाल है तो आज हम जानते हैं कि आखिर प्लाज्मा है क्या?

प्लाज्मा
Plasma

प्लाज्मा हल्के पीले रंग का चिपचिपा तरल द्रव है जो कुल रुधिर (Blood) का 50-55% हिस्सा होता है। प्लाज्मा में प्रोटीन, कार्बनिक एवं अकार्बनिक पदार्थ पाए जाते हैं जिसका 90-92% हिस्सा जल, 6-8% हिस्सा प्रोटीन, 1-2% हिस्सा कार्बनिक भस्म, अकार्बनिक लवण 0.3%, ग्लूकोज़ 0.18%, वसा 0.5% तथा अन्य 1-2% हिस्सा कार्बनिक पदार्थ होता है।

Plasma में जो भी प्रोटीन उपस्थित होता है उसे plasma protein कहलाते हैं। जैसे- एलब्यूनिम(4%), ग्लोब्यूलिन (2.5%), फाइब्रिनोजेन (0.3%) प्रोपर्टिन एवं प्रोथॉम्बिन (0.03%) एवं हिपैरिन होता है।

प्लाज्मा रक्त के थक्का बनने में भी सहायक होते हैं। रक्त जमने की प्रक्रिया में प्लाज्मा से फाइब्रिनोजेन अलग हो जाता है तथा प्लाज्मा का शेष भाग सिरम कहलाता है।

प्लाज्मा का मुख्य कार्य

प्लाज्मा का मुख्य कार्य सरल भोज्य पदार्थों का परिवहन करना, उत्सर्जी पदार्थों का परिवहन करना और कम मात्रा में गैसों का परिवहन करना इसका मुख्य कार्य होता।

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प्लाज्मा थेरेपी क्या है (Plasma Therapy kya hai)

प्लाज्मा इंसान के खून का सबसे बड़ा हिस्सा होता है। ब्लड से प्लाज्मा अलग करने पर यह हल्के पीले रंग का दिखता है। प्लाज्मा पानी, नमक और एंजायन्स  से मिलकर बना होता है। किसी भी व्यक्ति के कोरोना संक्रमित होने पर उसकी बॉडी में विशेष प्रकार की एंटीबॉडी (antibody) बनने लगती है यह एंटीबॉडी कोरोना वायरस पर हमला करके उसे नष्ट करने की कोशिश करती है ऐसे में कोरोना से ठीक होने वाले किसी भी मरीजों के ब्लड में यह एंटीबॉडी मौजूद रहती है।

उन्हें फिर इन्हें एक corona संक्रमित मरीज की बॉडी में डाल दिया जाता है। इसके बाद यह antibody उस व्यक्ति के शरीर में कोरोना वायरस को मारने में मदद करती है इस प्रक्रिया में plasma donor की बॉडी से सिर्फ प्लाज्मा ही लिया जाता है ब्लड का बाकी हिस्सा बॉडी में वापस चला जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को plasma therapy” कहा जाता है।

Plasma donate क्या है और कौन प्लाज्मा डोनेट कर सकता है

Plasma donate करने के लिए क्या-क्या शर्ते हैं और इन शर्तों को पूरा करने वाला कैसे अपना प्लाज्मा डोनेट कर सकता है तो आइए जानते हैं की इसकी eligibility क्या है और कौन-कौन लोग प्लाज्मा डोनेट कर सकते है।

  • सबसे पहले तो आपको कोरोना हुआ होना चाहिए यानी कि जिसको यह बीमारी हुई हो और उसके बाद आप इस बीमारी से ठीक हो गए हो और आपको ठीक हुए कम से कम 14 दिन हुए हो।
  • आप की उम्र 18 से 60 साल के बीच होनी चाहिए, आपका वजन 50 Kg से कम नहीं होना चाहिए।
  • महिलाएं जो जीवन में कभी भी एक बार प्रेग्नेंट हुई हो वह नहीं दे सकती।
  • जो लोग शुगर (sugar) की बीमारी से पीड़ित है और insulin ले रहे हैं या जिनका शुगर लेवल स्टेबल नहीं रहता वह नहीं दे सकते।
  • जिनको हाइपरटेंशन की बीमारी है या बीपी (BP) लेवल 140 के ऊपर है, वह नहीं दे सकते।
  • जो कैंसर (cancer) की बीमारी से पीड़ित है वह नहीं देख सकते हैं जिनको क्रॉनिक किडनी, लीवर या हार्ट की बीमारी है वह भी नहीं दे सकते।

जो भी डोनर इन सभी शर्तो को पूरा करता हो वही व्यक्ति कोरोना के मरीजों को प्लाज्मा डोनेट कर सकता है।

प्लाज्मा और रक्त के बीच का अंतर Difference Between  Blood and  Plasma

रक्त (Blood)

खून (रक्त) का रंग लाल होता है, रक्त शरीर का मुख्य तरल पदार्थ है जो शरीर की कोशिकाओं में महत्वपूर्ण और आवश्यक पोषक तत्वों, खनिजों, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और अपशिष्ट उत्पादों को परिवहन या प्रसारित करने के लिए जिम्मेदार है। चोट लगने के बाद रक्त ठोस पदार्थ बन जाता है और जम जाता है। रक्त प्लाज्मा, लाल रक्त कोशिकाओं, सफेद रक्त कोशिकाओं, प्लेटलेट्स आदि से बना होता है।

रक्तदान बहुत आम है और रक्त दान किया जाता है यानी रक्त में लाल रक्त कोशिकाएं, सफेद रक्त कोशिकाएं, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स आदि होते हैं।

प्लाज्मा (Plasma)

प्लाज्मा हल्के पीले रंग का होता है, प्लाज्मा वह पदार्थ है जो लाल रक्त कोशिकाओं, श्वेत रक्त कोशिकाओं और प्लेटलेट्स को हटाने के बाद रक्त में बचा रहता है। थक्का बनने के बाद प्लाज्मा सीरम में बदल जाता है सीरम एक स्पष्ट तरल है जो रक्त के जमने के बाद बनता है। प्लाज्मा पानी, प्रोटीन, पोषक तत्वों, थक्के बनाने वाले कारकों, एंटीजन, हार्मोन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि से बना होता है।

प्लाज्मा का दान भी संभव है। इस मामले में, रक्त एकत्र किया जाता है और प्लाज्मा को रक्त से अलग किया जाता है और रक्त फिर से दाता के शरीर में वापस प्रवेश कर जाता है।

प्लाज्मा डोनेट करने से होने वाले नुकसान (Plasma therapy for corona treatment side-effects)

प्लाज्मा डोनेट करने के लिए ज्यादातर लोग इसलिए डरते हैं कि इस बीमारी से कहीं वह फिर से संक्रमित ना हो जाए। प्लाज्मा डोनेट करके लोग अपनी जान जोखिम में नहीं डालना चाहते हैं। दूसरा डर उनको यह भी है कि कही उनके अपनों को ही प्लाज्मा की जरूरत ना पड़ जाए और कहीं उनको भी प्लाज्मा के लिए डर डर   की ठोकरे ना खाना पड़े यह सब बातें तो प्लाज्मा डोनेट करने से डरने की हुई। लेकिन क्या plasma donate से कोई नुकसान भी हो सकता है?

कुछ blood bank in-charges और doctors का मानना है कि प्लाज्मा डोनेट करने से कोई नुकसान नहीं होता है। कोरोना से ठीक होने के बाद यानी कि corona negative होने के 14 दिन बाद ही प्लाज्मा डोनेट कर सकते हैं और इससे डोनर की शरीर में कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन जिन मरीज को प्लाज्मा डोनेट हो रहा है, उसे इसके काफी side-effect होने के चान्सिस रहते हैं जो बहुत ही गंभीर भी हो सकते हैं।

कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी कितनी कारगर है

क्या प्लाजमा थेरेपी कोरोना मरीजों की जान बचाती है? तो इसका जवाब है ज्यादातर मामलों में “नहीं” ज्यादातर मामलों में यह थेरेपी असरदार नहीं होती।

एक स्टडी के मुताबिक इस समय भारत में कोरोना के जितने मरीज है, उनमें से सिर्फ 10% मरीजों को ही plasma therapy दी जा सकती है, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि इन 10% मामलों में भी यह प्लाजमा थैरेपि कारगर साबित नहीं होगी। इस संबंध में भारत के 18 बड़े डॉक्टर्स, वैज्ञानिकों और पब्लिक हेल्थ प्रोफेसर ने भारत सरकार को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें यह सिफारिश की गई है कि प्लाजमा थेरेपी से कोरोना के मरीज ठीक होने के सबूत नहीं मिलते इसलिए इसे लेकर सरकार को बड़े कदम उठाने चाहिए, नियम बनाने चाहिए और प्लाज्मा थेरेपी पर रोक लगा देनी चाहिए।

भारत में हुई कई शोध के आधार पर बड़े डॉक्टरो और वैज्ञानिक यह बताते हैं कि प्लाजमा थेरेपी कोरोना संक्रमित मरीजों पर कारगर नहीं है और यह बात सिर्फ हमारे देश के डॉक्टर्स और वैज्ञानिक ही नहीं मानते बल्कि ब्रिटेन (Britain) में इस विषय को लेकर 11हजार लोगों पर इसका परीक्षण किया गया और उस परीक्षण में plasma therapy का कोई पॉजिटिव कमाल नहीं दिखा यही नतीजे तब रहे जब अर्जेंटीना (Argentina) में इस पर रिसर्च हुआ।

भारत में मेडिकल रिसर्च करने वाली संस्था आईसीएमआर Indian Council of Medical Research (ICMR) ने भी पिछले साल इस पर एक रिसर्च की थी जिससे यह बात सामने आई थी कि प्लाजमा थेरेपी मृत्यु दर को कम करने और कोरोना पीड़ित गंभीर मरीजों को ठीक करने में कोई खास कारगर नहीं है। हालांकि आप सोच रहे हैं कि प्लाजमा थेरेपी कोरोना के मरीज की ठीक करने में कारगर नहीं है तो डॉक्टर प्लाज्मा की मांग क्यों रहे हैं तो इसका जवाब भी ICMR  ही है।

ICMR ने कोरोना मरीज के इलाज के लिए देशभर के अस्पतालों को एक गाइडलाइन जारी की है जिनमें यह बताया गया है कि अगर मरीज में वायरस के लक्षण मामूली है तो कैसे इलाज करना है, अगर मरीज में लक्षण मध्यम दर्जे के हैं तो कैसा इलाज करना है और अगर मरीज की हालत गंभीर है तो क्या इलाज और दवाइयां दिया जाए। इन गाइड लाइन में प्लाज्मा थेरेपी का भी जिक्र किया गया है और ICMR इसे लेकर दो बड़ी बातें करता है, पहली बात यह की थेरेपी का इस्तेमाल कोरोना के उन्ही मरीजों पर किया जा सकता है जिनमें संक्रमण के मामूली या मध्यम लक्ष्मण हो और दूसरी बात यह कि अगर इस श्रेणी के मरीजों को इलाज किया ही भी जाता है तो उसकी समय सीमा 4 से 7 दिन होनी चाहिए यानी कि यह थेरेपी संक्रमित होने के 4 से 7 दिन में ही दी जा सकती है और गंभीर मामलों में इसके इस्तेमाल की बात आईसीएमआर करता ही नहीं है। लेकिन इसके बावजूद हमारे देश में कई अस्पतालों में यह थैरेपी कोरोना मरीजों को दी जा रही है।

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Conclusion

देश में कोरोना महामारी के चलते एक शब्द बहोत ज्यादा प्रचलित हुआ है जिनके बारे में ज्यादातर लोगों को काफी कम मालूम है और आप भी इसके बारे में नहीं जानते तो ऊपर लेख में हमने काफी विस्तार से बताया है जिनको पढ़ कर आप लोगो को यह जानने मिला होगा की Plasma kya hai, प्लाज्मा थेरेपी क्या होती है, प्लाज्मा डोनेट क्या है, Plasma Donate कौन कर सकता है, plasma donate karne ke fayde aur nuksan,  प्लाज्मा और रक्त के बीच का अंतर क्या होता है और कोरोना के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी कितनी कारगर है जिनको लेकर अभी बहोत से न्यूज़ पे बाते होती रहती है इसके पीछे क्या कारन है।

यह प्लाज्मा के रिलेटेड जानकारी से आप लोगो को बहुत कुछ नया जानने को मिला होगा और यह सब जानकारिया आप लोगो को अभी कोरोना के चलते काम भी आ सकती है तो इसे और लोगो के साथ शेयर करे ताकि दुसरो को भी इससे फायदा मिल सके धन्यवाद्।

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