Pariksha me Safalta ke Upay in Hindi|क्या आप परीक्षा से डरते हैं?

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क्या आप परीक्षा से डरते हैं? Pariksha में Safal होने के Upay!

नमस्कार मित्रों,

आज हम बात करने जा रहे हैं परीक्षा की, उसके डर की। आखिर हर students  Exam से डरा हुआ क्यूँ रहता है? परीक्षा अपने आप मैं एक भरी भरकम शब्द है जो हर विद्यार्थी को एक भूत की तरह डराता है, तो क्या है ये परीक्षा का भूत आखिर हम परीक्षा से इतना डरते क्यूँ हैं? और pariksha में सफल होने के उपाय जानेगे।    

Pariksha me Safalta ke Upay in Hindi

आप सभी ने कभी न कभी इस डर को जरूर महसूस किया है चाहे कितना भी ज्ञानी व्यक्ति हो, कितनी भी विषय पर अच्छी पकड़ हो, चाहे कितनी भी अच्छी तैयारी हो। उसके बाद भी जब exam का समय करीब आता है तो साँस फूलने लगती है धड़कन की गति बढ़ जाती है।

हर व्यक्ति ने कोई न कोई परीक्षा जरूर दी है कोई लिखित और मौखिक परीक्षाएँ दे रहा है तो कोई वास्तविक जीवन संघर्षों से जूंझने की परीक्षा दे रहा है। हमें जीवन के हर कदम पर परीक्षाएँ देनी पड़तीं है। परीक्षाएँ हमारे जीवन का एक हिस्सा है फिर भी न जाने क्यू हम डरे हुये हैं।

कई सवाल हमारे दिमाग में चलते रहते हैं पता नहीं परीक्षा कैसी होगी? कैसे प्रश्न पूछें जाएंगे? जो मैंने पढ़ा है वो आएगा या नहीं? अगर असफल हो गया तो क्या होगा? और न जाने कौन कौन से सवाल हमारे दिमाग में घूमते रहते हैं। आखिर कैसे हम इन सवालों का जवाब पा सकेंगे?

सबसे पहले हमें यह जानना बहुत जरूरी है की आखिर इस डर का कारण क्या है, तो चलिये कोशिश करते है इस डर के कारण ढूंढने की और pariksha me safalta ke upay in hindi.

आखिर आप परीक्षा से डरते क्यूँ हैं?

1. असफलता का डर

असफलता का डर

Pariksha का सबसे बड़ा डर है असफलता का डर। हर परीक्षार्थी सोचता है कि कहीं वह असफल न हो जाए यदि ऐसा हुआ तो उसकी सभी उम्मीदें टूट सकतीं हैं। जी हाँ परीक्षार्थी चाहे कोई भी हो वह पहले से ही उम्मीद लगाकर परीक्षा देता है कि परीक्षा में कितना score करना है, आगे कहाँ admission लेना है।

परीक्षार्थी अपने भविष्य की रणनीति पहले ही बना चुके होते हैं ओर यही कारण होता है की वह बुरी तरह डर जाता है कि अगर उसका सपना टूटा तो क्या होगा और दूसरी ओर उन छात्रों में ये डर ज्यादा होता है जो इससे पहले कभी असफल हो चुके हैं। ये डर उनपर ज्यादा हावी होता है वे तनाव में आ जाते हैं और ठीक से तैयारी नहीं कर पाते।

2. परीक्षा की अनिश्चितता

हम लोग परीक्षा की बहुत तैयारी करते हैं परीक्षा का pattern देखते हैं, syllabus देखते हैं, पिछली परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्नों को पढ़ते हैं और फिर अपनी परीक्षा की रणनीति तैयार करते हैं। पढ़ने के लिए time table बनाते हैं और पूरी मेहनत से परीक्षा की तैयारी करते हैं। फिर भी कहीं न कहीं हमारे दिमाग में एक सवाल घूमता ही रहता है, क्या जो मैंने पढ़ा है वो enough है, इसमे कोई कमी तो नहीं रह गई, exam में कैसे questions पूछे जाएंगे, मैंने कोई कमी तो नहीं छोड़ दी आदि।

फिर भी परीक्षा आखिर परीक्षा है, पता नहीं क्या पूछा जाएगा ये सवाल अंत तक हमारा पीछा नहीं छोड़ता और हम तनाव में आते हैं यही तनाव आगे चलकर डिप्रेशन का कारण बन जाता है। आज कई students हैं जो डिप्रेशन के शिकार है।कहीं न कहीं ये भी उनके डिप्रेशन का एक कारण है।

3. समय का अभाव

समय का अभाव

ये कारण सभी students पर लागू नहीं होता कुछ बच्चे विषम परिस्थितियों में परीक्षा की तैयारी करते हैं। वे आर्थिक रूप से कमजोर हैं बावजूद इसके वे परीक्षा की तैयारी करते है उस परीक्षा से उनकी बहुत सी उम्मीदें जुड़ी होती हैं।

या फिर कोई विद्यार्थी ऐसा है जिस पर पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी है और वो अपने आप को थोड़ा समय देता है खुद को एक chance देता है ताकि कुछ अच्छा हो सके और परीक्षा की तैयारी करता है उसके पास समय का अभाव है क्यूंकी आगे ज़िंदगी उसे दूसरा chance नहीं देने वाली। इस परिस्थिति में वो छात्र दवाब में आ जाता है, पढाई में मन नहीं लगता और तनाव के कारण डिप्रेशन का शिकार होता है।

4. प्रतिस्पर्धा की भावना

प्रतिस्पर्धा की भावना

आज का समय competition का समय है यहाँ एक दूसरे से आगे निकलने की दौड़ लगी हुई है। नंबरों की होड़ इस कदर बढ़ गई है की आज हम इसलिए तैयारी करते हैं कि हमें सामने वाले व्यक्ति को हराना है और यही कारण है कि परीक्षा का डर एक भूत की तरह हमारे पीछे पड़ जाता है।

आज हम जीतने के लिए प्रयास नहीं करते बल्कि दूसरों को हराने का प्रयास कर रहें है और यही हमारे डर का कारण बनता है। आज हम कुछ सीखने के लिए नहीं पढ़ते बल्कि दूसरों को हराने के लिए नंबरों की race में दोड़ रहें है इसीलिए परीक्षा का डर हमारे मन मस्तिष्क में घर कर लेता है।

5. परीक्षा की सही तैयारी न होना

हम दो प्रकार के students को देखते हैं एक वो जो पूरी साल मेहनत करते हैं और दूसरे वो जो परीक्षा सिर पर आने पर ही तैयारी मे जुटते हैं।

ऐसे students तनाव और दवाब में चलें जाते है जब वे अपना syllabus देखते हैं तो बस यही सोचते रहते हैं कि इतना ज्यादा syllabus इतने कम समय में कैसे पूरा किया जाएगा और वे ठीक से अपना ध्यान पढ़ाई में नहीं लगा पाते परिणाम ये होता है कि वे जितना कर सकते थे उससे भी कम पर रह जाते हैं। धीरे धीरे उनकी स्थिति खराब होना शुरू हो जाती है डिप्रेशन जैसी बीमारियाँ उन्हें घेर लेतीं हैं।

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6. भूलने का डर

भूलने का डर

बच्चे पूरी साल मेहनत करते हैं पूरे जोश के साथ तैयारी करते हैं परंतु जैसे ही परीक्षा की तारीख पास आती है उन्हें ऐसा लगने लगता है जैसे वो सारा पढ़ा हुआ भूल चुके हैं दिमाग एकदम blank हो जाता है कुछ समझ नहीं आता। सवाल ये उठता है क्या वास्तव में आप सब कुछ भूल जाते हैं तो उसका जवाब है नहीं।

आप जो तैयारी करते है जो भी पढ़ते है आप उसे भूलते नहीं है ये सिर्फ आपका भ्रम है जो परीक्षा के समय मे students को अक्सर हो जाता है इस बात की पुष्टि इस बात से होती है जब आप परीक्षा में बैठते हैं तब आप exam sheet को खाली छोड़कर नहीं आते हैं बल्कि आपने जो पढ़ा था सब आपको याद आने लगता है। ये आपका भ्रम मात्र है और कुछ नहीं थोड़ा सा संयम और आत्मविश्वास आपको इस डर से बाहर निकाल देगा। अपनी बुद्धि और विवेक का प्रयोग करें, अपना आत्मविश्वास बनाए रखें ये डर स्वत: ही समाप्त हो जाएगा।

7. मनोवैज्ञानिक कारण

चाहे हमने कितनी भी तैयारी क्यूँ न की हो हम अपने विषय में कितने भी अच्छे क्यूँ न हों परंतु जैसे ही परीक्षा शब्द सुनते है एक अजीब सा डर मन में आ जाता है चाहे कोई कितना भी ज्ञानी क्यूँ न हो उसे भी परीक्षा से डर लगता है। ये एक अजीब सा डर है अजीब सी बेचैनी होने लगती है ये केवल एक student की बात नहीं है यहाँ तक की अगर एक अध्यापक भी exam देता है तो कहीं ना कहीं एक डर उसे भी होता है।

इसका एक मनोवैज्ञानिक कारण है यह डर हर परीक्षार्थी के अंदर है परंतु यह घातक तब बनता है जब यह डर आप पर हावी न होने दें और एक डर को हावी होने से रोकने के लिए आपको जरूरत है संयम आत्मविश्वास तथा सकारात्मक सोच की।

अब ये सवाल उठता है आखिर हम कैसे परीक्षा के इस डर से बाहर निकल सकते है कैसे निपटे परीक्षा के डर से और कैसे परीक्षा में सफल हो। क्योंकि जब तक हम इससे डरे हुये है तब तक हम अच्छा score नहीं कर पाएंगे।

अभी तक हमने परीक्षा का डर के कारण की चर्चा की है अब हम जानेंगे की कोशिश करेंगे की आखिर हम इस डर पर केसे जीत हासिल कर सकते हैं, कैसे हम परीक्षा के डर पर विजय प्राप्त कर सकते है और परीक्षा में सफल होने के उपाय के बारे में इस लेख के द्वारा जानने की कोशिश करेंगे।

Students खुद को समझे, खुद को समय दे, उनमें आत्मविश्वास और ऊर्जा का संचार हो ताकि वे अपना परीक्षा का डर खत्म कर पाए। आशा करता हूँ इस लेख के बाद आपका ये डर हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा तो चलिये कोशिश करते हैं इस डर को मात देने की:-  

ऐसे खत्म करें अपनी परीक्षा के डर को और जाने pariksha me safalta ke upay in hindi!

1. सकारात्मक सोच

सकारात्मक सोच

परीक्षा के समय में सबसे ज्यादा जरूरी है अपनी सोच को सकारात्मक बनाना। exam के समय कई तरह के नकारात्मक सवाल हमें घेर लेते हैं जैसे अगर पढ़ा हुआ परीक्षा में नहीं पूछा गया तो क्या होगा? अगर पढ़ा हुआ परीक्षा में भूल गए तो क्या होगा? अगर अच्छे अंक नहीं आए तो क्या होगा? और न जाने उस समय पर दिमाग में क्या क्या चलता रहता है।

एक ही second में हजारों विचार हमारे दिमाग में आते जाते रहते हैं और यही सब सोच-सोच कर हम तनावग्रस्त हो जाते हैं जिसकी वजह से result हमेशा नकारात्मक ही प्राप्त होता है यदि उस स्थिति में हम उन नकारात्मक विचारों पर विजय प्राप्त कर पाये तो result अवश्य सकारात्मक होगा। परंतु ये सब संभव हो सकता है सिर्फ और सिर्फ सकारात्मक सोच से।

परीक्षा में सफल होने का मंत्र|Pariksha me Safalta ke liye Mantra

यहाँ में सभी विध्यार्थियों को एक मंत्र देना चाहता हूँ और यकीन मानिए ये मंत्र पूरी तरह से काम करेगा मैंने इसे अपने जीवन में follow किया है और बेहतर results प्राप्त किए हैं ये बात में अपने personal experience के behalf पर आप लोगो के साथ share कर रहा हूँ।

जब भी आपको परीक्षा का डर सताये या आप डरे हुये हो और आप सवालों से घिर जाए तब उस स्थिति में आपको यही सोचना है जो तैयारी आपने की है वो enough है और इससे बाहर कोई भी question नहीं पूछा जाएगा तब आप पाएंगे कि आपके अंदर आत्मविश्वास बढ़ने लगा है आप सकारात्मक सोचने लगे हैं और अगर आप परीक्षा में कोई question नहीं कर पा रहे हैं कि यदि मैंने इतनी तैयारी की है और अगर में नहीं कर पा रहा हूँ तो और कौन कर पायेगा सभी इस question को अवश्य छोड़ेंगे इसलिए मुझे इसे छोड़ने का कोई नुकसान नहीं होगा।

इतना सोचने से परीक्षा देते वक्त आप लोग nervous नहीं होंगे और बाकी पेपर अच्छी तरह से कर पाएंगे। परीक्षा में हमेशा सोचना है आप सब जानते है और आपसे ज्यादा कोई नहीं जानता। इस मंत्र को हमेशा याद रखें कभी भी आपकी परीक्षा खराब नहीं होगी आप हमेशा परीक्षा में अच्छा परिणाम ही प्राप्त करेंगे।

2. आत्मविश्वास और संयम|Exam me top Karne ke Totke

आत्मविश्वास और संयम

आत्मविश्वास और संयम, यह भी एक बहुत बड़ा factor है “परीक्षा के डर” से निपटने के लिए। यदि हमें खुद पर विश्वास नहीं होगा तो हम परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाएंगे न ही परीक्षा का भूत भागा पाएंगे।

आपके अंदर इतना आत्मविशवास होना चाहिए कि आपने जो किया है जितना किया है वो सही और सटीक है और वो enough है आपके परिणाम को सकारात्मक बनाने के लिए। आत्मविश्वास आपके अंदर एक नहीं ऊर्जा एक नहीं स्फूर्ति का संचार करता है जो pariksha में safal होने में आपकी help करता है।

3. व्यायाम तथा ध्यान

व्यायाम तथा ध्यान

कहा जाता है “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता होता है” ये युक्ति बिलकुल तर्क संगत है। अगर आप अस्वस्थ हैं तब आपका मन कुछ भी काम करने में नहीं लगेगा। study करने के लिए शांत चित और मन की जरूरत होती है यदि आप स्वस्थ नहीं है तब आप पढ़ भी नहीं सकते।

इसलिए सबसे पहले आपको अपने शरीर का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है, उसके लिए आपको exercise करना चाहिए सुबह की सैर के लिए जाना चाहिए इससे आपका चित शांत और एकाग्र होगा, आपका मन स्थिर होगा पढ़ा हुआ याद रहेगा आप meditation करें। छात्रों को meditation के अनेक फायदें हैं जैसे –

  • एकाग्रता को बढ़ाना
  • आत्मविश्वास बढ़ना
  • छिपी हुई प्रतिभा बाहर आना
  • परीक्षा का डर खत्म होना
  • बेहतर परिणाम प्राप्त होना

इसके बाद जो सबसे अहम है वो है आपका खानपान, संतुलित आहार पर ध्यान दें, healthy खाना खाएं। इससे आपका दिमाग ठीक से काम करेगा, साथ ही याद रखें खाना समय पर खाएं। देखा जाता है की student  अपनी exam की तैयारी में इस कदर जुटते हैं कि खाना खाना ही भूल जाते हैं।

यदि आप ऐसा करते हैं तो आप बीमार पड़ सकते हैं, पढ़ाई से आपका मन भटक सकता है इसलिए याद रखें healthy खाएं समय पर खाएं। जहां तक संभव हो परीक्षा के समय में junk food न ही खाएं तो अच्छा है। आप देखेंगे कि आप पहले से बेहतर feel कर रहे हैं पढ़ाई में आपका मन लग रहा है पढ़ा हुआ याद रहने लगा है। आप अपने अंदर एक नया बदलाव महसूस करेंगे।

4. पूरी नींद लेना

पूरी नींद लेना

Exams के दिनों में बहुत जरूरी है कि आप पूरी नींद ले। यदि आप पूरी नींद नहीं लेते तो आपके दिमाग में तनाव पैदा होगा, व्यवहार में चिड़चिड़ापन देखने को मिलेगी जो आपकी परीक्षा के लिए बिलकुल भी ठीक नहीं है। विध्यार्थियों को कम से कम 6 घंटे की नींद लेना बहुत ही जरूरी है तभी आप परीक्षा में अपना 100% दे पाएंगे और अच्छा परिणाम प्रपट करेंगे।

5. समय का प्रबंधन

समय का प्रबंधन

यदि कोई भी बिध्यार्थी ठीक प्रकार से time management करता है तो वो अपनी दिनचर्या में study को ठीक प्रकार से जोड़ पाएगा। यदि आप अपने syllabus और time table के अनुसार पढ़ेंगे तो कम समय में अधिक topics को cover कर पाएंगे। आपकी तैयारी अच्छी होगी और परीक्षा का डर स्वत: ही समाप्त हो जाएगा।

6. पढ़ा हुआ दोहराना 

पढ़ा हुआ दोहराना

यदि आप आगे का पढ़ते जाएंगे और पीछे का नहीं दोहराएंगे तो आप देखेंगे आप सब भूलते जा रहें हैं और उससे हमारा आत्मविश्वास कम होता है। ये आम तौर पर देखा जाता है कि बच्चे आगे का तो याद करते रहते हैं परंतु पिछला पढ़ा हुआ दोहराते नहीं है।

यही आप भी ऐसा करते है तो अभी अपनी इस आदत को बादल दीजिये क्योंकि ये आदत exam से आपको डराती है और सफल होने से रोकती है। जितना भी आप पढ़ते है उसे जरूर दोहराएँ। इसके लिए आप दो तरीके अपना सकते है –

  • पहला ये कि आप रोज का पढ़ा हुआ एक साथ पूरा दोहराएँ।
  • दूसरा आप एक हफ्ते में जो भी पढ़ा हो उसे पूरे को दोहराएँ अगर लिख कर दोहराना possible हो तो ज्यादा अच्छा होगा।

निष्कर्ष

हर विध्यार्थी को अपनी क्षमताओं को पहचानने की जरूरत है यदि आप अपनी क्षमताओं को पहचान लेते हैं तो कोई भी डर आपको exams में सफल होने से नहीं रोक पायेगा। याद रखें यदि आप किसी exam की तैयारी कर रहे हैं तो अपनी क्षमता के अनुसार ही अपना लक्ष्य निर्धारित करें अन्यथा असफल होने पर आपको तनाव और निराशा हो सकती है।

pariksha me safal होना है तो लगातार बारह से चौदह घण्टे पढ़कर आप अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि आप पहले जान लें आपको क्या पढ़ना है? कितना पढ़ना है? और कैसे पढ़ना है? एक अच्छी रणनीति आपको एक अच्छा result दे सकती है।

दिनभर पढ़ते रहने से आप अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाएंगे, इसके लिए जरूरी है आप अपनी रणनीति बनाएँ, सुबह की सैर करें, स्वास्थ्य पर ध्यान दें, व्यायाम करें, अच्छा खाना खाएं, थोड़ा बहुत समय मनोरंजन के लिए निकालें। इससे आप तरोताज़ा महसूस करेंगे, आपके अंदर स्फूर्ति का संचार होगा, बुद्धि और विवेक ठीक से काम करेंगे और आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर पाएंगे। दोस्तों आशा करता हूँ की pariksha me safalta ke upay in hindi लेख को पढ़ने के बाद आपका परीक्षा के प्रति दृष्टिकोण अवश्य बदला होगा, आपको अवश्य इस लेख से कुछ सीखने को मिला होगा और आपको


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