भारत में सिक्कों का इतिहास क्या है? और भारत की प्राचीन मुद्राओं की संपूर्ण जानकारी

भारत में सिक्कों का इतिहास

“बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैया” दोस्तों यह लाइन तो सबने सुनी ही होगी। पैसे की बात करें तो आप सभी के Mind में मुकेश अंबानी का नाम सबसे पहले आएगा और यह आम बात है क्योंकि हमारा देश में टॉप टेन करोड़पति में मुकेश अंबानी का नाम सबसे पहले आता है।

क्या आपको पता है हमारे देश भारत के पास कितना पैसा है? “2675760 करोड़” जी हां दोस्तों आपने सही पढ़ा। अभी 17 जुलाई 2020 के आंकड़ों के अनुसार RBI यानी कि हमारे देश भारत के पास इतना पैसा मौजूद है।

आज के समय में कुछ भी खरीदने के लिए पैसे की जरूरत पड़ती है। हालांकि आज के दौर में हम धीरे-धीरे Case-less की ओर आगे बढ़ रहे हैं। पर हमें नहीं लगता कि निकट के भविष्य में इन Currency नोटों के बिना हमारा काम चल पाए।

क्या आप जानते हैं भारत में सिक्कों का इतिहास क्या है? (History of Indian Currency) और इन सिक्को और कागजी नोटों की शुरुआत हमारे देश में कब हुई थी?  इन नोटों पर महात्मा गांधी के फोटो कब छापा गए। यह सिक्के कब आने से पैसों में बदल गए। इस तरह की तमाम रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारी हम आपको आज इस Article में देने वाले हैं।

तो चलिए शुरू करते हैं, भारतीय सिक्कों और नोटों के इतिहास और वर्तमान के बारे में कुछ सुनी अनसुनी पहलुओं के बारे में।

भारतीय सिक्कों और नोटों का इतिहास (History of Indian Currency)

भारत में सिक्कों का इतिहास क्या है?

भारत में ई. सा. पूर्व प्रथम शताब्दी में भारत के शासकों द्वारा सिक्कों के निर्माण का कार्य प्रारंभ हो चुका था। शुरुआत में मुख्यत्व तांबे (Copper) और चांदी (Silver) के सिक्के का निर्माण हुआ। बाद के वर्षों में सोने (Gold) तथा अन्य धातु के सिक्के भी चलन में आए।

सिक्कों के साथ-साथ भारत में मुद्रा के रूप में कौड़ियों का भी उपयोग किया जाता था। सन 1957 में यह तय किया गया कि 1 रूपया 100 पैसे के बराबर होगा। पहले इसे आनो में बांटा जाता था। तब 16 आने बराबर ₹1 हुआ करता था।

(इसे हम एसे समजते है कौड़ि – दमड़ी – घेला – पाई – पैसा – आना – रुपया)

  • 3 फूटी कौडी = 1 कौडी
  • 10 कौडी = 1 दमड़ी
  • 2 दमड़ी = 1 घेला
  • 5 पाई = 1 घेला
  • 3 पाई = 1 पैसा
  • 4 पैसा = 1 आना

256 दमड़ी = 192 पाई = 128 घेला = 64 पैसा = 16 आना = 1 रुपया

  • 4 आना = 25 पैसा
  • 8 आना = 50 पैसा
  • 16 आना = 1 रूपया

एक समय ऐसा था जब Bangladesh में Blade बनाने के लिए ₹5 के सिक्के की तस्करी की जाती थी क्योंकि ₹5 के सिक्के से 6 ब्लेड बनते थे और एक ब्लेड की कीमत ₹2 हुआ करती थी। इस बात की जानकारी मिलने के बाद भारत सरकार ने सिक्के बनाने में इस्तेमाल होने वाले धातु को बदल दिया।

आजादी के बाद सिक्के तांबे के बनते थे। इसके बाद साल 1964 में इसे एल्युमीनियम के और साल 1988 में Stainless Steal के बनाने शुरू हो गए। अगर आप सिक्कों को गौर से देखेंगे तो इसके जारी किए गए साल के नीचे डायमंड (Diamond), डॉट (Dot) या फिर स्टार (Star) का निशान देखने को मिलेगा।

इनसे आप जान सकते हैं कि यह सिक्का किस टक्साल में बना है। भारत में सिक्कों की ढलाई चार  टक्साल में होती थी यदि चिह्न डायमंड का हो तो मुंबई, डॉट का हो तो नोएडा, स्टार का हो तो हैदराबाद और कोई चिन्ह ना हो तो कोलकाता।

सिक्को पर चिन्ह

पर चिन्ह

आप लोगों को यह जानकर हैरानी होगी कि ₹10 के सिक्के बनाने का खर्च ₹6.10 है। साथ में यह भी जान लीजिए कि 1, 2, 3, 5, 10, 20 और 25 पैसे के सिक्के 30 जून 2011 से प्रचलन में नहीं रहे है।

Note:- आप लोगों को पता होना चाहिए कि भारत में अभी 50 पैसे का सिक्का चलन के बाहर नहीं हुआ है। अभी आप उसको वैध सिक्का माना जाता है। कोई भी दुकानदार और पब्लिक उसको लेने से मना नहीं कर सकते और अगर कोई 50 पैसे का सिक्का लेने से मना करता है तो उसके खिलाफ क़ानूनी कार्यवाही की जा सकती है।

नए और पुराने प्राचीन भारतीय सिक्के

भारत की करेंसी नोटों का इतिहास और उसका विकास

क्या आप जानते हैं? रुपए शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द रूपया से हुई है जिसका मतलब होता है सही आकार और मोहर लगा हुआ सिक्का।

जब यूरोपीय कंपनियां व्यापार के लिए भारत आए तब उन्होंने अपनी सहूलियत के लिए यहां निजी Bank की स्थापना की और फिर इसके बाद से ही चांदी और सोने की धातु की मुद्रा की जगह कागजी मुद्रा (Currency Note) का चलन शुरू हुआ और भारत की सबसे पहली कागजी मुद्रा कोलकाता के Bank of Hindustan ने साल 1770 में जारी की थी।

भारत की यह कागजी मुद्रा 91वे सालों तक चली यानी साल 1861 तक, फिर अंग्रेज सरकार ने कागजी मुद्रा को लेकर कानून बनाया है। यानी साल 1861 से पहले यह सारी रुपए, राज्यो और ब्रिटिश व्यापारियों के सहयोग से स्थापित बैंको द्वारा जारी किए हुए थे।

लेकिन 1861 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने पेपर करेंसी एक्ट 1861 बनाया। इसके बाद उन्होंने विक्टोरिया पोट्रेट (Queen Victoria) सीरिस तहत अपने कागजी मुद्रा जारी करना शुरू किया।

यह कागजी मुद्रा 10, 20, 50, 100 और ₹1000 के थे, और इन सभी नोटों पर महारानी विक्टोरिया की छोटी सी तस्वीर भी लगी रहती थी। तो इस तरह ब्रिटिश सरकार द्वारा कागजी मुद्रा जारी की गई और बाद में यह मुद्रा भारत सरकार की अधिकारिक मुद्रा बनी।

लेकिन इस मुद्रा को जारी करने के साथ ही ब्रिटिश सरकार ने देश के एक बड़े हिस्से को अलग-अलग मुद्रा क्षेत्र में बांट दिया था क्योंकि यह करेंसी नोट भारत में कुछ जगह पर माननीय थी तो कुछ जगह पर मान्य थी तो कुच जगह पर यह मान्य नहीं थी।

जैसे Kolkata, Mumbai, Madras, Rangoon, Kanpur, Lahore और Karachi में माननीय थी। जैसे-जैसे भारतवर्ष में ब्रिटिश साम्राज्य अपना पैर पसरता गया ना सिर्फ रुपए के बनावट में बदलाव आया बल्कि इस पर कई अलग-अलग भाषाओं में रुपये का नाम भी लिखा जाने लगा।

भारत में करेंसी नोट कहाँ बनाया जाता है

साल 1923 में ब्रिटिश सरकार की Currency Note पर King George Pancham का चित्र भी छपा। यह चलन में आगे चलकर भी बरकरार रहा था और साथ ही यहां जानना भी जरूरी है कि साल 1928 में महाराष्ट्र के नासिक में पहला प्रिंटिंग प्रेस लगाया जाने के पहले तक सारी कागजी मुद्रा है। बैंक ऑफ इंग्लैंड (Bank of England) से छप कर आती थी।

लेकिन साल 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक यानि RBI की स्थापना हुई और अंग्रेज सरकार ने साल 1938 में Reserve Bank को भारत सरकार के नोटों को जारी करने का आदेश दे दिया गया था। तब रिजर्व बैंक ने 10,000 रूपये का नोट भी छपा था, जो आजादी तक बरकरार रहा था।

आरबीआई (RBI) द्वारा जारी की गई पहली करेंसी नोट ₹5 की नोट थी।

करेंसी नोटों का इतिहास
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आजाद भारत के बाद का करेंसी नोटों का इतिहास

आजादी के बाद का पहला करेंसी नोट 1 रूपये का था जिसे साल 1949 में जारी किया गया था। इससे पहले हमारे नोट पे जोर्ड पंचम की तस्वीर थी। उसे आजादी के बाद बदल कर चार सिहों वाले अशोक स्तंभ की तस्वीर लगाई गई जो बाद में भारत का राष्ट्रीय चिन्ह भी बना।

इसके इलावा भी नोटों पर कई बदलाव हुए और उस पर Gate Way of India, Brihadeeswarar temple के चित्र भी छापे गए। साल 1953 में भारत सरकार द्वारा जो नोट छापा गया उस पर “हिंदी भाषा” में भी लिखा गया था। इस तरह स्वतंत्र भारत में पहला नोट ₹1 का नोट था।

साल 1969 में भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 और 10 रूपये के नोट पर महात्मा गांधी के जन्म स्मारक डिजाइन वाली श्रिंखला जारी की थी और यह डिजाइन 10 रूपये के नोट पर थी वह करीब आगे 40 सालो तक चली।

साल 1980 के बाद नोटों पर कला, संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान के संबंधित चित्र व्यापक तौर पर छापे जाने लगे। इससे पहले कुछ राष्ट्रीय स्मारकों के चित्र छापे थे। फिर साल 1981 में 10 रूपये की नोट पर सामने की तरफ सिन्ह्चातुर्म्रुग का प्रतिक और पीछे की तरफ हमारे राष्ट्रिय पक्षी मोर पर बनी कलाकृति छापी जाने लगी।

फिर साल 1983 में ₹20 के नोट छापे गए जिसके पीछे की तरफ भी बौध चक्र बना हुआ था और आखिर में 1996 में महात्मा गांधी श्रंखला वाला नोट शुरू किया गया। अब हम हमेशा अपने करेंसी नोटों पर महात्मा गांधी की मुस्कुराती हुई तस्वीर देखते हैं।

History of Indian Currency

इसके बाद रुपए के नकल को रोकने के लिए कई सारे Security Futures डाल दिए गए और जो लोग देख नहीं पाते हैं यानी दृष्टिहीन लोगों की सहूलियत के लिए भी आज के नोटों में कई फीचर्स डाले गए ताकि वह अपने हाथ से छू कर पहचान सके कि यह कितने रुपए की नोट है।

June 1996 में 100 रूपये का नोट जारी किया गया। इसमें सामने की तरफ महात्मा गांधी और पीछे की तरफ हिमालय पर्वत श्रृंखला की तस्वीर थी। फिर मार्च 1997 में ₹50 का नोट जारी किया गया जिसमें सामने की तरफ महात्मा गांधी और पीछे की तरफ भारत के संसद की तस्वीर थी।

अक्टूबर 1997 में 500 रूपये का नोट जारी किया गया जिसमें सामने की तरफ महात्मा गांधी और पीछे की तरफ डांडी मार्च यानी कि नमक सत्याग्रह की तस्वीर थी। फिर नवंबर 2000 में 1000 रुपए का नोट जारी किया गया। इसमें सामने की तरफ गांधीजी और पीछे की तरफ भारत की अर्थव्यवस्था को दर्शाया गया था।

August 2001 में ₹20 का नोट जारी किया गया। इसमें सामने की तरफ गांधीजी और पीछे की तरफ माउंट हेरीटेज के खजूर के पेड़ और port blair lighthouse की तस्वीर थी और फिर नवंबर 2001 में ₹5 का नोट जारी किया गया, जिसमें सामने की ओर गांधीजी और पीछे कृषि के माध्यम से प्रगति दिखाई देती थी।

और आखिर जब नोट बंदी हुई थी उसके बारे में तो आप जानते ही हैं कि 500 और 1000 के नॉट बंद हो गए थे और 2000 का नया नोट जारी किया गया था। इसके इलावा 10, 20, 50, 100, 200 और 500 के नोट भी छापे जो अभी आप इस्तेमाल करते हैं।

तो दोस्तों यह था भारतीय सिक्कों ((History of Indian Coins and Currency)) और रुपए की करेंसी नोटों का पूरा इतिहास और उसके जुड़ी कुछ रोचक और अनसुनी बातें जो आप लोगों ने पढ़ी। हम आशा करते हैं  भारत में सिक्कों का इतिहास क्या है? और करेंसी नोटों से जुडी  हमारी यह जानकारी आप लोगों को अच्छी लगी होगी। अगर अच्छी लगी हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ Share करना बिलकुल ना भूले।

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