भारत का इतिहास क्या है? History of India in Hindi (2021)

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Bharat ka Itihas kya hai?

नमस्कार दोस्तों स्वागत है, आप सभी का हमारे My Secret Guide के नए और रोमांचक Topic में जिसमें हम आज आप लोगों को हमारे महान देश भारत के प्राचीन इतिहास के बारे में बताएंगे।

दोस्तों अगर हम भारत का इतिहास यानी की History of India के बारे में लिखने जाएंगे तो कई साल निकल जाएंगे क्योंकि Bharat ka Itihas kya hai in hindi इतना विशाल और पुराना है जिसे पूर्णतया बता पाना बड़ा मुश्किल है।

प्राचीन भारत का इतिहास क्या है? (Bharat ka Itihas kya Hai in Hindi)

प्राचीन भारत का इतिहास विश्व में सबसे पुराना इतिहास माना जाता है। भारत के इतिहास को जवाहर लाल नेहरू ने अपनी एक किताब Discovery of India में बताया है। भारत के इतिहास के कुछ पन्ने तो अभी भी निर्माण भिन्न है। Bharat Itihas को मानव प्रजाति “Homo Sapiens” के समय से माना जाता है जो आज से 75000 हजार साल पुराना है।

लेकिन भारतीय इतिहास की प्रमाणिकता आज से 5000 साल पुर्वीय मानी जाती है। तो आइए भारत के इतिहास (History of India) को संक्षिप्त में देखते हैं।

पूर्व एतिहासिक युग (The Pre Historical Era)

जैसे कि हमने बचपन की किताबों में पाषाण युग के बारे में पढ़ा है कि इस युग में मानव ने पत्थरों से औजारों को बनाने की कला सीखी ली थी। पाषाण युग अनुमति 5लाख से 2लाख साल पूर्व बताया जाता है।

इसके प्रमाण मध्य भारत की नर्मदा घाटी के नजदीक पाए गए थे। प्राचीन भारत के इतिहास के प्रमाणिकता के कुछ नमूने तमिलनाडु में भी मिले हैं और इसकी प्रमाणिकता को 75हजार वर्ष पूर्व माना जाता है। जब यहां पर एक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था।

ताम्र युग (Bronze Age)

ताम्र युग का आरंभ 33000 इ. पूर्व माना जाता है, जिसे सिंधु घाटी सभ्यता भी कहते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Velly Civilization) का केंद्र सिंधु नदी को माना जाता है जो घाघर घाटी, यमुना नदी, गुजरात और अफगानिस्तान तक फैली हुई थी।

इसके बाद इस सिंधु घाटी सभ्यता को केवल भारत के गुजरात, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान प्रान्त और पाकिस्तान के सिंध पंजाब और बलूचिस्तान तक फैल गया था।

सिंधु घाटी सभ्यता को Mesopotamia और प्राचीन मिश्र की शल्य सभ्यताओ के साथ मिश्र की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक माना जाता है। सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों हड़प्पा ने धातु कर्म की नई तकनीकों को हस्तशिल्प और घातु यानि की तांबा, पीतल, शीशा और जस्ता का उत्पादन शुरू कर दिया था।

सिंधु घाटी सभ्यता का विकास 2600 ईस्वी पूर्व से 1900 ईस्वी पूर्व हुआ, इसका केंद्र वर्तमान भारत के धोलावीरा, कालीबंगा और पाकिस्तान के हड़प्पा मोहनजोदड़ो को माना जाता है।

इस सभ्यता ने ईटों से घर बनाना, सड़कों के किनारे नालियां बनाना और बहुमंजिला इमारतें बनाने की कला सीख ली थी। 1700 ईस्वी पूर्व के अंत तक सिंधु घाटी सभ्यता का अंत शुरू हो गया और धीरे-धीरे यह सभ्यता लुप्त हो गई।

प्रागैतिहासिक काल  (Early History Period)

वैदिक काल (Vaidik Kal)

वैदिक काल का समय 1750 ईस्वी पूर्व से 500 ईस्वी पूर्व माना जाता है। वैदिक काल का निर्माण आर्य  सभ्यता से शुरू हुआ था। इसमें हिंदू धर्म के वेदों को वर्जित किया गया, मौजूदा ग्रंथों में वेदों को सबसे पुराना ग्रंथ माना जाता है।

इतिहासकारों ने वैदिक सभ्यता को पंजाब क्षेत्र और गंगा नदी के मैदानों तक फैला हुआ माना था। अथर्ववेद के समय में पीपल के पेड़ और गाय को पवित्र माना जाता था। वैदिक काल में ही धर्म और कर्म की आराधना ए भारत की सभ्यता में आई थी। ऋग्वेद को वेदों में सबसे पुराना ग्रंथ माना जाता है जोकि इ. स. से दूसरी सदी पूर्व का माना जाता है।

वैदिक काल में आर्य समाज को सबसे जनजाति माना जाता है, क्योंकि उस समय हड़प्पा संस्कृति लुप्त हो चुकी थी। अतः वैदिक काल के अंत तक आर्य समाज का विस्तार होना शुरु हो चुका था जो कि भारत के पश्चिमी उत्तरी इलाके से लेकर गंगा के मैदानों तक फैला हुआ था।

इस दौर में वर्णों का बनना शुरू हो गया था और उसी वर्ण व्यवस्था के आधार पर उन्होंने समाज का विभाजन करना शुरू कर दिया था। इस काल में खेती का महत्व बहोत ज्यादा बढ़ गया था।

इस काल में दूसरी छोटी-छोटी जनजातिओं ने भी सगठित हो कर Monarchyव्यवस्था प्रारंभ कर दी थी वैदिककाल के दौरान ही संस्कृत भाषा का जन्म हुआ ओए संस्कृत ग्रंथो से हिन्दू देवी, देवताओ के महत्वो को जानना शुरू किया।

वैदिक काल में कुरु साम्राज्य को सबसे पहला साम्राज्य माना जाता है जिसकी शुरुआत १२०० ईस्वी पूर्व  से 800 ईस्वी पूर्व में लौह युग की शुरुआत माना जाता है। वैदिक काल में ही हिंदू धर्म के सबसे बड़े ग्रंथ रामायण और महाभारत का उद्गम हुआ था।

वैदिक काल के अंत तक विदेहा साम्राज्य का उदय हुआ था, जिसका केंद्र वर्तमान भारत के बिहार और नेपाल में था। वैदिक काल के अंत के बाद महाजनपदों का निर्माण प्रारंभ शुरू हो गया था।

महाजनपद (Mahajanapadas)

800 ईसा पूर्व से 200 ईसा पूर्व तक जैन और बौद्ध धर्म का निर्माण हुआ था और उपनिषद लिखे गए थे। 500 ईसा पूर्व के समय को दूसरा शहरीकरण कहा जाता है। इसी काल में मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ था।

500 ईसा पूर्व में 16 राजतंत्र और गणतंत्र राज्यों को मिलाकर महाजनपद कहा जाता था जिसमें काशी (वाराणसी), कंशल (श्रावस्त), अंग (चमानगरी), मगध, वज्जी, मल्ल, छैवी, वत्स, कुरु, पानवाल, मत्स्य, शूरसेन, अरम्क, अवन्ती, गांधार और कम्बोज जनपद आते थे।

मौर्य साम्राज्य (Morya Samrajya)

मौर्य साम्राज्य पहला ऐसा साम्राज्य था जिसने पूरे भारत को एक राज्य में तब्दील कर दिया और भारतीय इतिहास में भारत उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा साम्राज्य बना। इस साम्राज्य की स्थापना मगध के चंद्रगुप्त मौर्य ने नंद साम्राज्य को हराकर की थी।

272 ईस्वी पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य की मृत्यु के बाद बिंदुसार ने मौर्य साम्राज्य की कमान संभाली और उसने भी चंद्रगुप्त के अखंड भारत के स्वप्न को बनाए रखा। केवल कलिंग क्षेत्र वर्तमान में उड़ीसा मौर्य साम्राज्य में शामिल नहीं था।

शृंग साम्राज्य (Shunga Empire)

187 ईसा पूर्व से 78 ईसा पूर्व तक शुंग साम्राज्य ने भारत उपमहाद्वीप के कई इलाकों पर अपना आधिपत्य कर लिया था। पुष्पमित्र शुंग ने मौर्य साम्राज्य के अंतिम शासक को मारकर इस साम्राज्य की स्थापना की।

पुष्यमित्र शुंग ने 36 वर्ष तक शासन किया और उसके पुत्र अग्निमित्र ने इस साम्राज्य को संभाला। शुंग  साम्राज्य पर 10 शासको ने राज किया और कई युद्ध जीते। उन्होंने कलिंग, सातवाहन, ग्रीक, युनानी, पंचालो और मथुरा शासकों को पराजित किया था। इनके शासन में शिक्षा का विकास हुआ था और कई इमारतें जैसे सांची स्तूपा बनवाए थे।

कुषाण साम्राज्य (Kushan Empire)

कुषाण साम्राज्य का उदय वर्तमान अफगानिस्तान से शुरू हुआ था। इसके प्रथम राजा कुजुल कडफ़ाइसिस  ने पहली सदी ईस्वी पूर्व के मध्य में भारत में कुच किया। यह भारतीय यूरोपीय लोगों के मिश्रण वाले शासक थे।

राजा कुजुला के पोते कनिष्क ने उत्तर भारत के काफी राज्यों पर अपना आधिपत्य स्थापित कर दिया था, जिसमे साकेत पाटलिपुत्र गंगा के मैदान और बंगाल की खाड़ी आते थे।

इन्होंने मध्य एशिया से चीन तक बौद्ध धर्म का प्रचार किया। अशोक के बाद कनिष्क पहला ऐसा भारतीय शासक था जिसने बौद्ध धर्म का महत्व समझ कर उसका विस्तार किया।

गुप्त साम्राज्य (Gupta Empire)

Prachin Bharat के Itihas का स्वर्ण युग कहा जाने वाला साम्राज्य गुप्त साम्राज्य था, जिन्होंने भारत के राज्यों को फिर से संगठित किया। इस साम्राज्य की स्थापना चंद्रगुप्त प्रथम ने की थी।

चंद्रगुप्त प्रथम के बाद समुद्रगुप्त, चंद्रगुप्त द्रितीय, कुमारगुप्त प्रथम और स्कंद गुप्त जैसे शासकों ने साम्रज्य की कमान संभाली और भारत के इतिहास को विकास की ओर ले गए। इस युग में विज्ञान, तकनीक, कला, गणित, धर्म, दर्शन शास्त्र और खगोल शास्त्र का उदय हुआ। इस युग में शून्य का आविष्कार हुआ था। बाकी इससे पहले 1 से 9 तक अंक होते थे।

 हर्ष साम्राज्य  (Harsha)

हर्षवर्धन ने 606 ईस्वी से 646 ईस्वी तक उतरिय भारत के कई हिस्सों पर राज किया। हर्ष वर्तमान हरियाणा के प्रभाकर वर्धन के बेटे राजवर्धन के छोटे भाई थे।

उन्होंने बहुत कम समय में अपना साम्राज्य पंजाब, राजस्थान, गुजरात, बंगाल और ओडिशा तक फैला दिया था। गुप्त वंश के पतन के बाद उत्तरी भारत छोटे-छोटे राज्यों में बस गया था। हर्ष ने बौद्ध धर्म अपना लिया था। उन्होंने 16 वर्ष की उम्र में पंजाब और मध्य भारत के छोटे-छोटे गणराज्य को एकत्रित कर खुद को महाराजा की उपाधि दे दी।

हर्ष कन्नौज के रहने वाले थे, लेकिन उन्होंने लगभग उत्तरीय भारत के कई हिस्सों को अपने अंदर मिला लिया, उनके दरबार में शांति और समृद्धि पर चर्चाएं होती रहती थी।

चालुक्य एवं पल्लव (Chalukya & Pallava)

छठी से आठवीं सदी तक दक्षिण भारत के चालुक्य और पल्लव नरेशो का वर्चस्व रहा। राष्ट्रपुत्र ने चालुक्य से और चोल वंश के पल्लवों से वहां की सत्ता छीन ली।

बंगाल में पालवंश ने आठवीं और नौवीं सदी में शासन किया और उसके पश्चात सनवंश के लोग बंगाल के शासक बन गए। दक्षिण में चोल वंश काफी प्रभावी रहा। इनका राज्य श्रीलंका और मालदीव तक था  चौथी सदी के मालिक काकुर के आक्रमण तक ये दक्षिण में राज करते थे।

तो दोस्तों यह थी जानकारी Bharat ka Itihas kya hai in hindi और Prachin Bharat Ke Itihas की, अब हम जानेंगे भारत देश के बारे में पूरे ‍‌विस्तार से।

भारत के कितने नाम है? (Bharat ke Kitne Naam Hai)

भारत एक ऐसा नाम है जो खुद में कई कहानियां समेटे हुए हैं। हम अपने देश को भारत के नाम से जानते हैं, लेकिन इसके अतिरिक्त इसे कई उपनामों से भी संबोधित किया जाता रहा है।

Aryavarta, Jamuvi, Bharat khand, Bharat, Hindustan और अंग्रेजी में India, हालांकि आज के परिपेक्ष में अगर आप देखेंगे तो भारत के अलावा आपको दो और नाम मुख्य रूप से दिखाई या सुनाई देंगे। हिंदुस्तान और इंडिया।

अब आप सोचेंगे कि कैसे एक देश के इतने नाम पड़े तो आइए आपको थोड़ी जानकारी इस विषय में भी दे दे।

भारत नाम की उत्पति प्राचीन भारत के चक्रवर्ती सम्राट भरत चक्रवर्ती से हुई है। इनके कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले साम्राज्य ने इनकी ख्याति बधाई और इन्ही के नाम पर अपने देश का नाम भारतवर्ष पड़ा। हालांकि इनका पीछे कोई विद्वानों के अलग-अलग मत है।

कहते हैं जब आर्यों का प्रवेश इस देश में हुआ तो वेह कबीलों के रूप में पूरे देश में फैल गए और फिर एक बड़ा कबीला भारत के नाम से प्रचलित हुआ। एक अन्य मत के मुताबिक मध्य युग में जब तुर्किस्तान से कुछ विदेशी लुटेरे और ईरानी लोग देश में दाखिल हुए तो वह पहले पहल सिंधु घाटी में ही घुसे और यहां रहने वाले लोगों को उन्होंने हिंदू की संज्ञा दी जो सिंधु के ही एक अंश है।

हिंदुओं के देश को उन्होंने हिंदुस्तान के नाम से हर जगह फैलाया और इनके अंग्रेजी नाम के पीछे भी कई कहानियां जुडी है। पूर्व के समय में सिंधु घाटी को “Indus Velly” के नाम से भी जाना जाता था और इसी इंडस वैली की वजह से देश का नाम इंडिया पड़ा।

अब एक दूसरे मत को सही मानें तो कहा जाता है कि Elex Jender जब भारत आया तो उसने Hindu के एच (H) को हटाकर Indu कर दीया जो बाद के समय में “INDIA” बन गया।

भारत की कितनी भाषा? (Bharat ka Itihas kya hai or Bharat ki Bhasae)

भारत की मुख्य विशेषता यह है कि यहां विभिन्नता में एकता है। भारत में विभिन्न का स्वरूप ना केवल भौगोलिक है बल्कि भाषाएं तथा सांस्कृतिक भी है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में 1652 मातृ भाषाए प्रचलन में है, जबकि संविधान द्वारा 22 भाषाओं को राजभाषा की मान्यता प्रदान की गई है।

संविधान के अनुच्छेद 344 के अंतर्गत पहले केवल 15 भाषा को राजभाषा की मान्यता दी गई थी, लेकिन 21 वें संविधान संसोधन के द्वारा सिंधी को तथा 71 वा संविधान संशोधन द्वारा नेपाली, कौकानी तथा मणिपुरी को भी राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया।

बाद में 92वा संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के द्वारा संविधान को आठवीं अनुसूची में 4, नई भाषा बोडो, डोंगरी, मैथिली तथा संथाली को राजभाषा में शामिल कर लिया गया।

इस प्रकार अब संविधान में 22 भाषाओं को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है। भारत में इन 22 भाषाओं को बोलने वाले लोगों की कुल संख्या लगभग 90% है। इन 22 भाषाओं के अतिरिक्त अंग्रेजी भी सहायक राजभाषा है और यह मिजोरम, नागालैंड तथा मेघालय की राजभाषा भी है।

इस तरह कुल मिलाकर भारत में 58 भाषाओं में स्कूलों में पढ़ाई की जाती है। संविधान की आठवीं अनुसूची में उन भाषाओं का उल्लेख किया गया है जिन्हें राजभाषा की संज्ञा दी गई है।

भारत की जनसंख्या कितनी है? (Bharat ki Jan Sankhya)

हमारे देश की गिनती दुनिया के सबसे बड़े देशों में की जाती है। चाहे वह क्षेत्रफल हो या फिर आबादी हर क्षेत्र में भारत का नाम आता है। क्षेत्रफल के हिसाब से भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है। वहीं अगर आबादी की बात करें तो भारत का नाम चीन के बाद आता है। हमारा कहने का मतलब है कि आबादी में हमारा देश दुनिया में दूसरे स्थान पर आता है।

वैसे दोस्तों भारत की जनसंख्या की गणना हर 10 वें साल में की जाती है। पिछली बार की जनसंख्या साल 2011 में की गई थी, जिसके हिसाब से हमारे भारत की आबादी लगभग 121 करोड से ज्यादा थी। कुछ दिनों के बाद भारत की आबादी की गणना फिर से की जाएगी जिनसे आप लोगो को सटीक जानकारी मिल पाएगी।

अगर किसी को पूछा जाए कि भारत की आबादी क्या है तो उसका जवाब अलग-अलग हो सकता है और इसके पीछे का कारण यह है कि देश की आबादी निरंतर बढ़ती रहती है। ऐसे में इसकी सटीक जानकारी बता पाना बहुत मुश्किल है।

हालांकि Internet पर कई Website है जो दुनिया की जनसंख्या लगातार Count करती रहती है। इनमें से एक Website है www.worldometers.info जिसके अनुसार इस समय भारत की आबादी लगभग एक अरब 1 अरब 38 करोड़ है।

भारत में कितने राज्य है? (Bharat ka Itihas kya hai or Bharat ke Rajya)

दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यूं तो भारत के कुल 29 राज्य हुआ करते थे। लेकिन जम्मू एवं कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019, राज्यसभा और लोकसभा में पारित होने के बाद 28 राज्यों और 9 केंद्र शासित प्रदेश होंगे। जम्मू, कश्मीर और लद्दाख को भी केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया है।

तो दोस्तों आखिर में हम आप लोगो से बस इतना ही कहना कहते है की Bharat ka Itihas kya hai in Hindi से जुडी जानकारी अगर अच्छी लगी हो और इससे जुड़े कोई Question आप के मन में हो तो आप नीचे दिए गए Comment Box में पूछ सकते है ।

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